वीनस : प्यार का 'गवर्निंग प्लेनेट'
शुक्र की स्थिति ही युवाओं की लाइफ में लव और सेक्स की दशाएँ और दिशाएँ तय करती हैं लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो यह पूर्ण सत्य नहीं है। इसके लिए और भी ग्रह जिम्मेदार हैं।
किसी भी लड़की की होरोस्कोप में बृहस्पति ग्रह मेल हार्मोन बढ़ाता है , इमोशनल सपोर्ट की अपेक्षाओं को जन्म देता है।
वीनस ग्रह लड़कों में प्रेम का कारक होता है। यही वीनस ज्यूपिटर को संतुलित रखता है।
जब किसी कारण से दो प्लेनेट का कॉम्बिनेशन इम्बैलेंस्ड या इक्वल होता है तो प्रेम मिलने का आधार पैदा होता है।
चंद्रमा यानी मून, मन का मालिक होता है अतः चंद्रमा का भी प्रेम मिलने में अहम किरदार है।
कन्या की कुंडली में चंद्रमा और बृहस्पति एक साथ मजबूत बैठे हों,एक-दूसरे में दृष्टि संबंध हो, स्थान परिवर्तन योग हो, शुक्र बृहस्पति के मुकाबले कमजोर हो, नवम-पंचम में हो तो प्रेम का योग बनता है।
ज्योतिषाचार्य शंकर चरण त्रिपाठी बताते हैं कि एस्ट्रोलॉजी में प्रेम मंगल और शुक्र दोनों की युति, स्थान तथा दृष्टि पर निर्भर करता है।
चूँकि लव का सीधा संबंध हार्ट से है अतः चौथे स्थान पर बैठा हुए चंद्रमा से कुंडली के चौथे, आठवें, बारहवें तथा सातवें भावों पर अगर मंगल और शुक्र स्थित हो तो जातक लव ही नहीं करता लव मैरिज भी करता है। अगर इन पर कई ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति कुशल प्रेमी होगा /
यानी जितने ग्रह इसे देख रहे होंगे उतनी बार वह प्रेम करेगा। चूंकि प्रेम का मूल स्वभाव मंगल और शुक्र की स्थिति से तय होता है।
यही ग्रह प्रेम विवाह की सफलता के भी प्रतीक हैं लेकिन यदि मंगल और शुक्र की दृष्टि ही केवल चौथे, आठवें, बारहवें और सातवें स्थान पर पड़ रही हो तो जातक दिलफेंक किस्म का होता है। प्रेम के चलते आत्महत्या तक पहुँचने वाले जातकों में सप्तम का स्वामी अष्टम में, अष्टम का स्वामी सप्तम में या सप्तम का स्वामी छठे में व उलट होता है।
ज्योतिषाचार्य राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि प्रेम करने की वृत्ति के लिए शुक्र का मूलतः स्वग्रही होने के साथ-साथ शुक्र का तुला राशि में या अपनी उच्च मीन राशि में होना जरूरी है।
इसी के साथ यदि जन्म कुंडली में शुक्र लग्न में बैठा हो और सप्तमेश से योग कर रहा हो यह युति एक साथ हो तो प्रेम विवाह की संभावना बलवती होती है।
यदि सप्तमेश लग्न में बैठा हो और शुक्र से दृष्ट हो तथा बृहस्पति निर्बल अवस्था में हो व नवमेश की स्थिति दुर्बल हो तो इंटरकास्ट लव की संभावनाएँ कही जा सकती हैं।
मूलतः पुरुष के होरोस्कोप में शुक्र तथा स्त्री के होरोस्कोप में मंगल तथा बृहस्पति विवाह के कारक ग्रह हैं।
प्रेम का मूल कारक ग्रह शुक्र यदि जन्मांग में सप्तमेश से संयोग कर रहा हो तथा भाग्य अथवा धर्मस्थान का मालिक निर्बल हो तो इंटरकास्ट विवाह और प्रेम तथा सबल हो तो कास्ट यानी जाति में विवाह और प्रेम की बात कही जा सकती है।
ज्योतिषी दीपक मालवीय भी प्रेम और सेक्स के लिए शुक्र की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं। शुक्र पंचम भाव से अलग कुंडली के अन्य स्थानों पर बैठा हो और उस पर सूर्य, शनि, राहु, केतु और मंगल की दृष्टि हो तब प्रेम और सेक्स के योग निश्चित बनते हैं।
विवाह का कारक ग्रह सप्तमेश है।
यह तृतीय, छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो, उन पर सूर्य, शनि, राहु, केतु , मंगल ग्रहों की दृष्टि हो तो निश्चित ही प्रेम विवाह का योग
बनता है।
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