दुनिया भर में पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव
वर्ष 2011 के आखिरी चन्द्रग्रहण के दिन चंदर ग्रहण से बन रहे योग का विशेष प्रभाव दुनिया भर में पड़ेगा
यह खग्रास चन्द्रग्रहण पूरे देश में और विशव के काफी हिस्से इस से परभावित होंगे दिखाई पड़ेगा।
10 दिसंबर का चन्द्रग्रहण रोहिणी नक्षत्र में प्रारंभ हो रहा है। इस दिन शाम 6.30 बजे तक रोहिणी नक्षत्र है।
ग्रहण शुरू होने के 15 मिनट बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा, जो मंगल प्रधान है, इसलिए मंगल व चन्द्र की युति कष्ट पैदा करेगी।
इस संबंध में आज से 600 साल पहले वराह मिहिर ने अपने ग्रंथ वृहद संहिता व पंच सिद्घांतिका में इसका उल्लेख भी किया है।
चंद्रग्रहण का शुभ-अशुभ फल
10 दिसंबर को चंद्रग्रहण है। अतःइस समय अनुष्टान नियम एवं संयम के साथ {यह ग्रहण संध्या समय से रात्री को सर्द ऋतू का है } स्नान जप, तप, और हवन यज्ञ के द्वारा बाधाओं की निवृत्ति एवं सुखों की प्राप्ति के लिए करना चाहिए।
दिव्य पर्वों में ग्रहण का भी विशेष स्थान है।
वर्ष 2011 के आखिरी चन्द्रग्रहण के दिन चंदर ग्रहण से बन रहे योग का विशेष प्रभाव दुनिया भर में पड़ेगा
यह खग्रास चन्द्रग्रहण पूरे देश में और विशव के काफी हिस्से इस से परभावित होंगे दिखाई पड़ेगा।
10 दिसंबर का चन्द्रग्रहण रोहिणी नक्षत्र में प्रारंभ हो रहा है। इस दिन शाम 6.30 बजे तक रोहिणी नक्षत्र है।
ग्रहण शुरू होने के 15 मिनट बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा, जो मंगल प्रधान है, इसलिए मंगल व चन्द्र की युति कष्ट पैदा करेगी।
इस संबंध में आज से 600 साल पहले वराह मिहिर ने अपने ग्रंथ वृहद संहिता व पंच सिद्घांतिका में इसका उल्लेख भी किया है।
चंद्रग्रहण का शुभ-अशुभ फल
10 दिसंबर को चंद्रग्रहण है। अतःइस समय अनुष्टान नियम एवं संयम के साथ {यह ग्रहण संध्या समय से रात्री को सर्द ऋतू का है } स्नान जप, तप, और हवन यज्ञ के द्वारा बाधाओं की निवृत्ति एवं सुखों की प्राप्ति के लिए करना चाहिए।
दिव्य पर्वों में ग्रहण का भी विशेष स्थान है।
बुद्धि पर प्रभाव से shubh लाभ उठाने के लिए जप, ध्यानादि का विधान है। ग्रहण के समय किए गए जप, यज्ञ, दान आदि का सामान्य की अपेक्षा बहुत अधिक महत्व वर्णित है। ग्रहण के समय स्त्री प्रसंग से नर-नारी दोनों की नेत्र ज्योति क्षीण हो जाती है। अनेक बार अंधे होने का भी भय हो जाता है।
इस प्रकार ग्रहण का प्रभाव तर्क एवं परीक्षण से भी सिद्ध है। ग्रहण काल में मन माने आचरण से मानसिक अव्यवस्था और बुद्धि विकार तो होता ही है साथ ही शारीरिक स्वास्थ्य की भी बड़ी हानि होती है। अतः इस संबंध में सबको सावधान रहना चाहिए साथ ही कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।
2011 में खग्रास चंद्रग्रहण हैं जो भारत में दिखाई देगा। इनका विवरण निम्न है :-
खग्रास चंद्रग्रहण, 10 दिसंबर 2011, समय घ.मि.से.।
1. चंद्र का उप छाया प्रवेश कांति मलिनता 17:01:37।
2. चंद्र का छाया प्रवेश ग्रहण का आरंभ 18:15:11।
3. खग्रास चंद्रग्रहण आरंभ ग्रहण का अधिकतम 19:25:29।
4. खग्रास समाप्त 20:27:45।
5. चंद्र का छाया निकास ग्रहण समाप्त 21:48:04।
6. चंद्र का उपछाया निकास कांति निर्मलता 23:01:30।
7. ग्रहण का ग्रास मान 1:11:00।
8. खग्रास ग्रहण की 00:52:54।
9. ग्रहण का पूर्ण काल स्पर्श से मोक्ष तक की अवधि 3:32:54।
ग्रहण का सूतक : ग्रहण आरंभ के 9 घंटे पहले से अर्थात 9:36 बजे से लगेगा। बालक, अशक्त आदि पथ्य आहार शाम 5 बजे तक आवश्यकता होने पर ले सकते हैं। ग्रहण के समय मंत्र दीक्षा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है, क्योंकि इस समय मनकारक चंद्र, आत्मकारक सूर्य, पंचतत्वीय शरीर कारक पृथ्वी तीनों एक ही तल पर एक ही लय में होते हैं।
अतएवं जो ब्राह्मंड में सो पिण्ड में सिद्धांत अनुसार ग्रहण का समय ध्यान में लगाने से इष्ट मंत्र जप करने से सफलता व सिद्धि शीघ्र मिलती है।
ग्रहण फल : वृषभ राशि के दो नक्षत्र रोहिणी एवं मृगशिरा इससे प्रभावित हैं, इसलिए इस राशि के व्यक्ति इस समय ईश्वर आराधना अवश्य करें।
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