तुला का शनि और बारह राशियों पर प्रभाव
तुला का शनि और आपकी राशि
- पं. अशोक पंवार मंयक
* मेष राशि वालों के लिए शनि का भ्रमण दशमेश व एकादशेश होकर सप्तम भाव से होने की वजह से जीवनसाथी से लाभकारी रहेगा। दैनिक व्यापार-व्यवसाय में भी लाभ के योग हैं। भाग्य पर सम दृष्टि है अत: भाग्य के मामलों में मिलीजुली स्थिति देगा। लग्न पर यानी स्वयं पर स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का कारण भी बनेगा। दशम दृष्टि चतुर्थ भाव पर सम होने से पारिवारिक, जनता से संबंधित, माता से संबंधित मामलों में ठीक ही रहेगा। स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होने पर सरसों का तेल या काले तिल का तेल प्रत्येक शनिवार को जमीन पर गिराएं।
* वृषभ राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण षष्ट भाव से भाग्येश व दशमेश होने से शत्रु पक्ष प्रभावहीन होंगे। कर्ज की स्थिति से छुटकारा मिलेगा। बाहरी मामलों में सावधानी रखें, स्वास्थ्य ठीक ही रहेगा। व्यापार, नौकरी, पिता के मामलों में रूकावटों के बाद सफलता रहेगी, पराक्रम बढ़ेगा।
* मिथुन राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण पंचम भाव से अष्टमेश व भाग्येश होकर रहेगा। इसके फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी, विद्या में सफलता, परिश्रम पूर्ण, स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जीवनसाथी के मामलों में समय ठीक ही कहा जा सकता है। आय के मामलों में बाधा रह सकती है। धन कुटुंब के मामलों में मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कर्क राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण चतुर्थ भाव से सप्तमेश व अष्टमेश से होकर रहने के कारण प्रथम पारिवारिक मामलों मे कठिनाई के बाद सफलता का रहेगा। शत्रु प्रभावहीन होंगे। राज्य, पिता, व्यापार, नौकरी के मामलों में सावधानी रखना होगी। स्वयं को संभल कर चलना होगा।
* सिंह राशि वालों के लिए शनि तृतीयेश से भ्रमण करेग। षष्ट व सप्तमेश होने के कारण पराक्रम अधिक करने पर सफलता मिलेगी। भाईयों, मित्रों, साझेदारियों से लाभ व सहयोग रहेगा। भाग्य के क्षेत्र में थोडी़ बाधा भी रहेगी, शनिवार को सरसों या काले तिल का तेल जमीन पर गिराएं। बाहरी मामलों में मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कन्या राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण द्वितीय भाव से पंचमेश व षष्टेश होने से वाणी के प्रभाव से लाभ रहेगा। सन्तान का सहयोग भी रहेगा। परीक्षाओं में सफल भी होंगे। वाहनादि सावधानी से चलाएं। आय के मामलों में मिलीजुली स्थिति रहेगी।
* तुला राशि वालों के लिए शनि राशि से ही भ्रमण चतुर्थेश व पंचमेश होकर करने से प्रभाव में वृद्धि, नवीन कार्य होंगे। सन्तान से लाभ, माता, भूमि, भवन, जनता के कार्यों से लाभ रहेगा। जीवनसाथी से चिंता भी रहेगी। राज्य, व्यापार, नौकरी आदि में सफलता रहेगी।
* वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण द्वादश भाव से तृतीयेश व चतुर्थेश होने से पराक्रम द्वारा ही सफलता के योग हैं। किसी महत्वपूर्ण कार्य में भाई की सलाह या मदद ठीक रहेगी। पारिवारिक स्थिति ठीक-ठीक ही रहेगी। शत्रु पक्ष से बचकर चलना होगा। शनि की साढे़साती प्रारंभ होगी, जो लाभकारी भी रहेगी। भाग्य व धर्म के मामलों में मिलीजुली स्थिति रहेगी।
* धनु राशि वालों के लिए शनि का गोचरी भ्रमण द्वितीयेश व तृतीयेश होकर एकादश भाव से भ्रमण करने से धन कुटुंब, वाणी के प्रभाव से लाभ मिलेगा, धन की बचत भी कर पाएंगे। भाईयों का सहयोग मिलेगा, मित्र से भी अनुकूल स्थिति पाएंगे। विद्यार्थी वर्ग सावधानी से बरतें। पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें। स्वास्थ्य ठीक ही रहेगा, आयु उत्तम रहेगी।
* मकर राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण दशम भाव से होकर लग्न व द्वितीयेश होने से स्वप्रयत्नों से उत्तम सफलता मिलेगी। पराक्रम बढ़ेगा, धन कुटुंब का भी सहयोग रहेगा। माता के मामलों में सावधानी रखें। मकान, जमीन के सौदों में संभलकर चलें। जीवनसाथी से मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कुंभ राशि वालों के लिए द्वादशेश व लग्नेश होकर नवम भाग्य भाव से भ्रमण करने से भाग्यबल द्वारा सफलता के योग हैं। साथ ही महत्वपूर्ण कार्य भी बनेंगे। भाग्य साथ देगा, भाईयों के मामलों में सावधानी रखना होगी। शत्रु पक्ष प्रभावहीन होंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पिता का सहयोग मिलेगा। देश-विदेश की यात्रा भी संभव है।
* मीन राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण अष्टम भाव से एकादशेश व द्वादशेश होने से आय के मामलों में कठिनाई आएगी, लेकिन आवश्यक पूर्ति भी होगी। बाहरी मामलों में सहयोग रहेगा। धन कुटुंब में खर्च होगा। सम्मान भी बढ़ेगा। स्वविवेक का इस्तेमाल लाभदायक रहेगा।
क्या करें जब तुला के शनि का असर कम करना हो
शनि की साढे़साती का प्रभाव सिंह से हटकर वृश्चिक वालों को शुरू होगा। कन्या को उतरती, तुला को मध्य से, वृश्चिक को लगती साढे़साती रहेगी।
कन्या, तुला को लाभकारी, वृश्चिक को चिंताजनक रहेगी।
शनि के अशुभ प्रभाव होने पर कोई भी किसी भी राशि वाले जातक सरसों या काले तिल का तेल एक चम्मच जमीन पर गिराएं।
काला सुरमा अपने सिर से पैर की और नौ बार उतार कर जमीन में गाढ़ देने से अशुभ प्रभाव में कमी आएगी।
नीलम सोच-समझ कर ही पहनें
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तुला का शनि और आपकी राशि
- पं. अशोक पंवार मंयक
* मेष राशि वालों के लिए शनि का भ्रमण दशमेश व एकादशेश होकर सप्तम भाव से होने की वजह से जीवनसाथी से लाभकारी रहेगा। दैनिक व्यापार-व्यवसाय में भी लाभ के योग हैं। भाग्य पर सम दृष्टि है अत: भाग्य के मामलों में मिलीजुली स्थिति देगा। लग्न पर यानी स्वयं पर स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का कारण भी बनेगा। दशम दृष्टि चतुर्थ भाव पर सम होने से पारिवारिक, जनता से संबंधित, माता से संबंधित मामलों में ठीक ही रहेगा। स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव होने पर सरसों का तेल या काले तिल का तेल प्रत्येक शनिवार को जमीन पर गिराएं।
* वृषभ राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण षष्ट भाव से भाग्येश व दशमेश होने से शत्रु पक्ष प्रभावहीन होंगे। कर्ज की स्थिति से छुटकारा मिलेगा। बाहरी मामलों में सावधानी रखें, स्वास्थ्य ठीक ही रहेगा। व्यापार, नौकरी, पिता के मामलों में रूकावटों के बाद सफलता रहेगी, पराक्रम बढ़ेगा।
* मिथुन राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण पंचम भाव से अष्टमेश व भाग्येश होकर रहेगा। इसके फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी, विद्या में सफलता, परिश्रम पूर्ण, स्वास्थ्य ठीक रहेगा। जीवनसाथी के मामलों में समय ठीक ही कहा जा सकता है। आय के मामलों में बाधा रह सकती है। धन कुटुंब के मामलों में मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कर्क राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण चतुर्थ भाव से सप्तमेश व अष्टमेश से होकर रहने के कारण प्रथम पारिवारिक मामलों मे कठिनाई के बाद सफलता का रहेगा। शत्रु प्रभावहीन होंगे। राज्य, पिता, व्यापार, नौकरी के मामलों में सावधानी रखना होगी। स्वयं को संभल कर चलना होगा।
* सिंह राशि वालों के लिए शनि तृतीयेश से भ्रमण करेग। षष्ट व सप्तमेश होने के कारण पराक्रम अधिक करने पर सफलता मिलेगी। भाईयों, मित्रों, साझेदारियों से लाभ व सहयोग रहेगा। भाग्य के क्षेत्र में थोडी़ बाधा भी रहेगी, शनिवार को सरसों या काले तिल का तेल जमीन पर गिराएं। बाहरी मामलों में मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कन्या राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण द्वितीय भाव से पंचमेश व षष्टेश होने से वाणी के प्रभाव से लाभ रहेगा। सन्तान का सहयोग भी रहेगा। परीक्षाओं में सफल भी होंगे। वाहनादि सावधानी से चलाएं। आय के मामलों में मिलीजुली स्थिति रहेगी।
* तुला राशि वालों के लिए शनि राशि से ही भ्रमण चतुर्थेश व पंचमेश होकर करने से प्रभाव में वृद्धि, नवीन कार्य होंगे। सन्तान से लाभ, माता, भूमि, भवन, जनता के कार्यों से लाभ रहेगा। जीवनसाथी से चिंता भी रहेगी। राज्य, व्यापार, नौकरी आदि में सफलता रहेगी।
* वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण द्वादश भाव से तृतीयेश व चतुर्थेश होने से पराक्रम द्वारा ही सफलता के योग हैं। किसी महत्वपूर्ण कार्य में भाई की सलाह या मदद ठीक रहेगी। पारिवारिक स्थिति ठीक-ठीक ही रहेगी। शत्रु पक्ष से बचकर चलना होगा। शनि की साढे़साती प्रारंभ होगी, जो लाभकारी भी रहेगी। भाग्य व धर्म के मामलों में मिलीजुली स्थिति रहेगी।
* धनु राशि वालों के लिए शनि का गोचरी भ्रमण द्वितीयेश व तृतीयेश होकर एकादश भाव से भ्रमण करने से धन कुटुंब, वाणी के प्रभाव से लाभ मिलेगा, धन की बचत भी कर पाएंगे। भाईयों का सहयोग मिलेगा, मित्र से भी अनुकूल स्थिति पाएंगे। विद्यार्थी वर्ग सावधानी से बरतें। पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें। स्वास्थ्य ठीक ही रहेगा, आयु उत्तम रहेगी।
* मकर राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण दशम भाव से होकर लग्न व द्वितीयेश होने से स्वप्रयत्नों से उत्तम सफलता मिलेगी। पराक्रम बढ़ेगा, धन कुटुंब का भी सहयोग रहेगा। माता के मामलों में सावधानी रखें। मकान, जमीन के सौदों में संभलकर चलें। जीवनसाथी से मिलीजुली स्थिति पाएंगे।
* कुंभ राशि वालों के लिए द्वादशेश व लग्नेश होकर नवम भाग्य भाव से भ्रमण करने से भाग्यबल द्वारा सफलता के योग हैं। साथ ही महत्वपूर्ण कार्य भी बनेंगे। भाग्य साथ देगा, भाईयों के मामलों में सावधानी रखना होगी। शत्रु पक्ष प्रभावहीन होंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। पिता का सहयोग मिलेगा। देश-विदेश की यात्रा भी संभव है।
* मीन राशि वालों के लिए शनि का गोचरीय भ्रमण अष्टम भाव से एकादशेश व द्वादशेश होने से आय के मामलों में कठिनाई आएगी, लेकिन आवश्यक पूर्ति भी होगी। बाहरी मामलों में सहयोग रहेगा। धन कुटुंब में खर्च होगा। सम्मान भी बढ़ेगा। स्वविवेक का इस्तेमाल लाभदायक रहेगा।
क्या करें जब तुला के शनि का असर कम करना हो
शनि की साढे़साती का प्रभाव सिंह से हटकर वृश्चिक वालों को शुरू होगा। कन्या को उतरती, तुला को मध्य से, वृश्चिक को लगती साढे़साती रहेगी।
कन्या, तुला को लाभकारी, वृश्चिक को चिंताजनक रहेगी।
शनि के अशुभ प्रभाव होने पर कोई भी किसी भी राशि वाले जातक सरसों या काले तिल का तेल एक चम्मच जमीन पर गिराएं।
काला सुरमा अपने सिर से पैर की और नौ बार उतार कर जमीन में गाढ़ देने से अशुभ प्रभाव में कमी आएगी।
नीलम सोच-समझ कर ही पहनें
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