धर्म, आध्यात्म एवं ज्योतिष जगत में ११ नंबर का विशेष महत्व है। इस अंक में एक अंक का दो बार प्रयोग हुआ है। एक अंक का स्वामी सूर्यदेव है और जिसे ग्रहों का राजा माना गया है। अंक ११ का मूलांक २ है और अंक२ का स्वामी चंद्रदेव है। इस प्रकार अंक ११ को सूर्य और चंद्रदेव दोनों का आशीर्वाद प्राप्त है।
यदि ११ ,११, ११ को जोड़कर मूलांक निकाला जाए तो 6 आता है । इस अंक के स्वामी शुक्रदेव है और इस दिन शुक्रवार भी है। शुक्रदेव को सांसारिक सुखों, वैभव और ऐश्वर्य का कारक माना गया गया है।
इसी तरह यदि 11 नवंबर की तारीख और समय का मूलांक जोड़ा जाए तो मूलांक 3 आता है, इस अंक के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है। बृहस्पति को धार्मिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। इस तारीख को सूर्यदेव एवं चंद्रदेव के साथ-साथ बृहस्पति और शुक्र की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
{११,११,२०११} का योग ८ शनि देव का होगा.... शायद हमें इस पर ही विचार करना चाहिए ...क्योंकि निचे ११,११,११,की कुंडली शायद कुछ और ही कह रही है.....
यदि ११ ,११, ११ को जोड़कर मूलांक निकाला जाए तो 6 आता है । इस अंक के स्वामी शुक्रदेव है और इस दिन शुक्रवार भी है। शुक्रदेव को सांसारिक सुखों, वैभव और ऐश्वर्य का कारक माना गया गया है।
इसी तरह यदि 11 नवंबर की तारीख और समय का मूलांक जोड़ा जाए तो मूलांक 3 आता है, इस अंक के स्वामी देवगुरु बृहस्पति है। बृहस्पति को धार्मिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है। इस तारीख को सूर्यदेव एवं चंद्रदेव के साथ-साथ बृहस्पति और शुक्र की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
{११,११,२०११} का योग ८ शनि देव का होगा.... शायद हमें इस पर ही विचार करना चाहिए ...क्योंकि निचे ११,११,११,की कुंडली शायद कुछ और ही कह रही है.....
विरोधाभास
इस सदी में 11 तारीख को 11वें माह में सन् 2011 में ठीक 11 बजकर 11 मिनट व 11 सेकंड में जन्मा बालक या बालिका का मकर लग्न, वृश्चिक नवांश, मेष राशि, कृत्तिका नक्षत्र, प्रथम चरण व लोहे का पाया होगा। उसका नाम 'अ' से आ रहा है।
जन्म के समय सूर्य की महादशा में मंगल का अंतर व शनि का प्रत्यंतर है। यह स्थिति कष्ट का संकेत देती है। स्थान भेद से नवांश में अंतर आ सकता है, यह लग्न व नवांश इन्दौर के अक्षांश व रेखांश से निर्धारित किया गया है।
मेष राशि का स्वामी मंगल अष्टम में सिंह राशि में होने से माता को कष्ट रहेगा। वहीं धन के मामलों में कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ सकता है।
मंगल की आय भाव पर चतुर्थ स्वदृष्टि पड़ने से आय प्राप्ति में मुश्किलों के योग हैं। गुरु-चंद्र साथ होने से गजकेसरी योग बन रहा है लेकिन गुरु के वक्री होने से लाभ की आशा कम है।
लग्न व द्वितीय भाव का स्वामी शनि नवम (भाग्य भाव) में मित्र (कन्या राशि का) का है। अत: भाग्य का साथ मिलने से मुश्किल हालात में भी सहयोग मिलता रहेगा।
तृतीय (पराक्रम) व द्वादश भाव (व्यय) का स्वामी गुरु वक्री होने से मेहनत खूब करना पड़ेगी तभी सफल होगा। पंचम व दशम का स्वामी शुक्र एकादश भाव में षष्ट भाव के स्वामी बुध-राहु के साथ होने से विद्या के मामलों में भी परिश्रम से लाभ रहेगा।
अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में नीच (तुला राशि का सूर्य नीच का माना जाता है) का होने से व्यापार, नौकरी, पिता आदि के मामलों में थोड़ी बाधा रहेगी। कुल मिलाकर ग्रहों की स्थिति यही कहती है कि इस बालक को संघर्ष करना पड़ेगा।
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इस प्रकार ११।११.१०११, को ११.११.११ समय की कुंडली और अंक शास्त्र का फर्क कुछ और ही कहता है......
इस सदी में 11 तारीख को 11वें माह में सन् 2011 में ठीक 11 बजकर 11 मिनट व 11 सेकंड में जन्मा बालक या बालिका का मकर लग्न, वृश्चिक नवांश, मेष राशि, कृत्तिका नक्षत्र, प्रथम चरण व लोहे का पाया होगा। उसका नाम 'अ' से आ रहा है।
जन्म के समय सूर्य की महादशा में मंगल का अंतर व शनि का प्रत्यंतर है। यह स्थिति कष्ट का संकेत देती है। स्थान भेद से नवांश में अंतर आ सकता है, यह लग्न व नवांश इन्दौर के अक्षांश व रेखांश से निर्धारित किया गया है।
मेष राशि का स्वामी मंगल अष्टम में सिंह राशि में होने से माता को कष्ट रहेगा। वहीं धन के मामलों में कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ सकता है।
मंगल की आय भाव पर चतुर्थ स्वदृष्टि पड़ने से आय प्राप्ति में मुश्किलों के योग हैं। गुरु-चंद्र साथ होने से गजकेसरी योग बन रहा है लेकिन गुरु के वक्री होने से लाभ की आशा कम है।
लग्न व द्वितीय भाव का स्वामी शनि नवम (भाग्य भाव) में मित्र (कन्या राशि का) का है। अत: भाग्य का साथ मिलने से मुश्किल हालात में भी सहयोग मिलता रहेगा।
तृतीय (पराक्रम) व द्वादश भाव (व्यय) का स्वामी गुरु वक्री होने से मेहनत खूब करना पड़ेगी तभी सफल होगा। पंचम व दशम का स्वामी शुक्र एकादश भाव में षष्ट भाव के स्वामी बुध-राहु के साथ होने से विद्या के मामलों में भी परिश्रम से लाभ रहेगा।
अष्टम भाव का स्वामी दशम भाव में नीच (तुला राशि का सूर्य नीच का माना जाता है) का होने से व्यापार, नौकरी, पिता आदि के मामलों में थोड़ी बाधा रहेगी। कुल मिलाकर ग्रहों की स्थिति यही कहती है कि इस बालक को संघर्ष करना पड़ेगा।
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इस प्रकार ११।११.१०११, को ११.११.११ समय की कुंडली और अंक शास्त्र का फर्क कुछ और ही कहता है......
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