गोचर अथवा किसी जातक की कुंडली में शुभ व सौम्य लग्न,भाव में जब क्रूर ग्रह किसी अन्य क्रूर ग्रह के साथ कोई योग बनाए या दृष्ट हो या युति करे तो जातक हिंसक व आपराधिक प्रकृति का होगा जैसे शुभ या सौम्य लग्न में राहु विराजमान हो तथा शनि से देखा जा रहा हो,कुंडली में मंगल नीच का हो तो ऐसे में नीच के मंगल की दशा में या अन्तर्दशा में जातक के हाथ से हिंसक व अप्रिय घटना होने के योग व अपराधी बनने के योग प्रबल होंगे।

वहीं, जब कोई शुभ ग्रह क्रूर ग्रह द्वारा अशुभ दृष्टि से देखा जा रहा हो तो भी ऐसे ही कुछ योग बनते है। जिनकी कुंडली में अष्टम का मंगल होता है और चन्द्र-राहु-शुक्र की युति त्रिक भावों में होती है अथवा लाभ भाव मे होती है। यदि जातक की जन्म कुंडली में मंगल कुपित अवस्था में है तो उस जातक के अंदर क्रोध बहुत अधिक होगा और वह क्रोध के समय अंधा हो जाएगा। यदि समय रहते इस क्रोध को नियंत्रित नहीं किया गया तो यही क्रोध अपराध को जन्म देता है।

राशिफल: इंसान बन जाता है हिंसक, ये है कुंडली योग दोष!

अपराधिक प्रवृत्ति को जन्म देने वाला दूसरा महत्वपूर्ण कारण है राहू। ये छाया ग्रह किसी जातक में अपराधिक प्रवृत्ति उत्पन्न करता है। यदि किसी कुंडली में चंद्रमा या बृहस्पति कमजोर हो और राहू-मंगल का योग हो तो ये निश्चित रूप से अपराधी प्रवृत्ति को जन्म देता है। राहु मंगल के कारण जो प्रवृत्तियां उत्पन्न होती है उसमें व्यक्ति खूंखार और आक्रामक होता है। यही वे लोग होते हैं जो परिस्थितिवश कत्ल, एक्सीडेंट या आतंकी वारदातों को जन्म देते हैं।




नीच या शत्रु राशि का शनि और उसके साथ केतु(नवमांश मे भी यदि यह युति बनी रहती है)व्यक्ति को धोखेबाज,अनैतिक और भ्रष्ट बनाता है। यह योग जितना प्रबल होगा,व्यक्ति उतना ही बड़ा धूर्त होगा और धर्म,राजनीति तथा रिश्तों की आड़ में बड़े से बड़ा दुराचार करेगा।

नीचस्थ चंद्र और राहू या नीचस्थ चंद्र और मंगल अथवा चंद्र और नीचस्थ मंगल योग करें तो अपराध क्षणिक भावुकता का परिणाम होता है। ऐसा व्यक्ति बुरा नहीं होता। परन्तु किसी मानसिक रोग अथवा कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण अपराध कर बैठता है। क्योंकि ये लोग भावना प्रधान होते हैं,अत:अहं और प्रतिष्ठा पर चोट पहुंचने से,प्रेम भावना आहत होने से, धोखे की अनुभूति से या कभी-कभी किसी की रक्षा की प्रवृति से ये लोग जघन्य अपराध कर बैठते हैं। इन लोगों में रिश्तों,घर-परिवार, अपनी जमीन,अपना शहर,अपनी विचारधारा, अपना दोस्त आदि की भावना बहुत प्रबल होती है। इन बच्चों को यदि बचपन से सही परवरिश दी जाए तो ये विलक्षण व्यक्तित्व साबित होते हैं अन्यथा अपराधी या आतंकवादी भी बन सकते हैं।

शनि तथा राहू का समवेत प्रभाव बच्चे को अपराध करने का आदी या शौकीन बनाता है। ये लोग फैशन के लिए,अपनी छोटी-मोटी जरुरत के लिए भी किसी का कितना बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इन लोगों के मन में अपने परिवार के प्रति ममता,श्रद्घा नहीं होती और वक्त पड़ने पर अपने परिवार के लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। देश,समाज या मित्र के साथ भी ये ठगी कर सकते हैं।

उपाय- मानिसक संतुलन हेतु योग का सहारा अवश्य लें। घर में कलह का वातावरण संतान को आपराधिक प्रवृत्ति की तरफ ले जाता है। अत: कलह से बचें। आक्रामक प्रवृत्ति के खिलौने,तस्वीरें,टीवी कार्यक्रम,पोस्टर इत्यादि से बच्चों को दूर रखें। बच्चों को रचनात्मक प्रवृत्ति की तरफ बढ़ाएं तथा घर में कला, संगीत,साहित्य,गणित आदि का माहौल बनाएं।

लाल, नीले, तेज हरे और तेज पीले रंग का परहेज कराएं। महामृतुन्जय मंत्र व जिस भी ग्रह का अशुभ योग बन रहा हो उसका समय रहते जाप करा कर शांति करा लेना उत्तम और एक मात्र उपाय है।

वास्तु दोष जो अपराधी बनाते है-

किसी व्यक्ति के घर में यदि दक्षिण-पश्चिम और विशेषकर दक्षिण-पूर्व का क्षेत्र खुला है या उसमे कोई दोष है तो ऐसे जातक बहुत ही हिंसक होते है। उनमे जीव हत्या करने के साथ साथ आत्महत्या की भी प्रवृति अत्यधिक होती है।

रह रह कर अत्यधिक क्रोध आना, मादक पदार्थ का सेवन करना,असामाजिक व्यक्तियों का साथ उन्हें अधिक सुहाता है।

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