कारोबारी परेशानियों से बचाता है श्री लक्ष्मी गणेश मंत्र। कुंडली में चतुर्थ एवं दशम स्थान इच्छाशक्ति एवं कर्मठता के सूचक होने के कारण धन कमाने में सहायक होते हैं। दूसरी ओर षष्ठ,अष्टम एवं व्यय भाव,जो कर्ज, अनिष्ट एवं हानि के सूचक हैं,व्यापार में हानि और परेशानी देने वाले होते हैं।
श्रीलक्ष्मी विनायक मंत्र-
ऊं श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमनाय स्वाहा।
विधि-हर रोज सुबह स्नान से निवृत्त होकर आसन पर पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख बैठकर आचमन एवं प्राणायाम कर श्रीलक्ष्मी विनायक मंत्र के अनुष्ठान का संकल्प करना चाहिए। तत्पश्चात चौकी या पटरे पर लाल कपड़ा बिछाएं। भोजपत्र/रजत पत्र पर अष्टगंध एवं चमेली की कलम से लिखित इस लक्ष्मी विनायक मंत्र पर पंचोपचार या षोडशोपचार से भगवान लक्ष्मी गणेश जी का पूजन करना चाहिए। इसके बाद विधिवत विनियोग,न्यास एवं ध्यान कर एकाग्रतापूर्वक मंत्र का जप करना चाहिए। इस अनुष्ठान में जपसंख्या सवा लाख से चार लाख तक है।
अनुष्ठान के दिनों में गणपत्यथर्वशीर्षसूक्त, श्रीसूक्त,लक्ष्मीसूक्त,कनकधारास्तोत्र आदि का पाठ करना फलदायक है।
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