दशहरा पूजन के अभिजित मुहूर्त

दशहरा पूजन के अभिजित मुहूर्त
दशहरा पर नवीन खरीदी के शुभ मुहूर्त
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यूं तो दशहरा अपने आपमें शुभ दिन माना गया है। यही वजह है कि इस दिन लोग नवीन वस्त्र, आभूषण, शस्त्र, वाहन तथा ध्वजा की पूजा करते हैं। इस दिन नवीन सामग्री की खरीदारी का भी महत्व है। दशहरा के शुभ दिन में भी अगर शुभ मुहूर्त जान लिए जाए तो कार्य सिद्धि व सफलता के लिए अतिशुभ होता है। इसी तरह रावण दहन के लिए भी शुभ मुहूर्त देखा जाता है।

वेबदुनिया धर्म तथा ज्योतिष विशेषज्ञ टीम ने विशेष तौर पर धर्मालुओं के लिए शुभ मुहूर्त प्रस्तुत किए हैं। यह पूजन मुहूर्त मात्र नवीन वस्तुओं के लिए ही नहीं है बल्कि उपलब्ध सामग्री की भी इस दिन साजसज्जा कर पूजा की जानी जाहिए।

जैसे-चाहे आपका वाहन पुराना हो गया हो पर दशहरे पर उसे विशेष रूप से स्वच्छ कीजिए और हार-फूल चढ़ाकर उसकी पूजा कीजिए। इससे वाहन से अशुभ साया दूर होता है और उसकी शुभता में वृद्धि होती है। अर्थात वह आपके लिए अनुकूल होता है। उसकी चोरी, खराबी, तकनीकी अड़चनें आदि से यथासंभव छुटकारा मिलता है। इसी तरह अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, घर, गहने, शस्त्र आदि को भी दशहरे के दिन विशेष सम्मान व दुलार करें। प्रस्तुत है मुहूर्त खास आपके लिए :


शस्त्र व वाहन पूजन का मुहूर्त : प्रात: 6.00 से 09.00 तक, दिन 10.30 बजे से 12.00 तक, शाम 4.30 से 6.00 गोधूली बेला, रात 7.30 से 9.00 बजे तक।

(अपने वाहन को धोकर सुंदर सजाएं। उस पर फूल माला अर्पित करें तथा समस्त देवी-देवता के वाहनों का स्मरण कर, नवग्रहों का स्मरण कर पूजा करें।)

घर में पूजन हेतु मुहूर्त : दिन 10.30 बजे से 12.00 तक, शाम 7.30 से 9.00 बजे तक।

(रामरक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, आदित्य ह्रदय स्त्रोत,दुर्गा चालीसा एवं सुंदरकांड में से किसी एक का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।)

अभिजित मुहूर्त : सुबह 6.00 से 09.00 तक, अपराह्न 11.48 से 12.15, शाम 4.30 से 6.00 गोधूली बेला में।

(यह मुहूर्त सभी प्रकार के कार्य आरंभ करने के लिए हैं। इस मुहूर्त में शुरू किए गए कार्यों में कोई विघ्न नहीं आता। इस मुहूर्त में पूजन कर कोई भी शुभ मनोकामना की जाए तो वह अवश्य ही पूरी होती है।)

रावण-दहन का मुहूर्त : गोधूली बेला में 4.30 से 6.00 बजे, शाम 7.30 से 9.00, रात 10.10 से 11.13 बजे तक रावण-दहन का शुभ मुहूर्त है।

(रावण-दहन से पूर्व मां अंबे भवानी और बजरंग बली की आराधना की जानी चाहिए। भगवान श्रीराम की अर्चना की जानी चाहिए। तत्पश्चात श्रीराम के जयघोष के साथ रावण-दहन का कार्य संपन्न करना चाहिए।)

विशेष- दिन 1.43 से 03.12 तक किसी भी प्रकार का पूजन कार्य ना करें।

सामान्य शुभ समय- प्रात: 7.00 से 9.10, दिन- 10.00 से 12.50। सायं 4.12 से 6.30।

नोट : अभिजित योग एवं गोधूली बेला में किसी भी प्रकार का पूजन आप कर सकते हैं।

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