दुर्गा सप्तशती के चमत्कारिक मंत्र

दुर्गा सप्तशती के चमत्कारिक मंत्र

दुर्गासप्तशती अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने वाली है। जो पुरुष जिस भाव और जिस कामना से श्रद्घा एवं विधि-विधान के साथ मंत्रों का सम्पुट जाप करता है उसे उसी भावना और कामना के अनुसार निश्चय ही फल प्राप्त होता है। बिगड़े हुए काम शीघ्र बनने लगते हैं। चारों ओर से नए रास्ते खुलने लगते हैं। दुर्गासप्तशती का प्रत्येक मंत्र अमोघ फल देने वाला एवं चमत्कारिक है। आप भी इन मंत्रों का जाप कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं।

स्वप्न में सिद्घि-असिद्घि जानने के लिए
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थ साधिके।
मम सिद्घिमसिद्घिं वा स्वप्ने सर्व प्रदर्शय।।

मोक्ष प्राप्ति के लिए
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या।
विश्वस्य बीजं परमासि माया।।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्।
त्वं वैप्रसन्ना भुवि मुक्त हेतु:।।

धन-पुत्रादि प्राप्ति के लिए
सर्वाबाधा विर्निर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।।

शक्ति प्राप्ति के लिए
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोह्यस्तु ते।।

सभी के कल्याण के लिए
सर्व मंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोह्यस्तु ते।।

रक्षा का मंत्र
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि: स्वनेन च।।

दारिद्र-दु:ख नाश के लिए
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:।
स्वस्थै स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।।
द्रारिद्र दु:ख भयहारिणि का त्वदन्या।
सर्वोपकारकारणाय सदाह्यह्यद्र्रचिता।।

बाधा शांति के लिए
सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्दैरिविनाशनम्।।

रोगों का शमन करने के लिए

रोगनशेषानपहंसि तुष्टा।
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां।
त्वमाश्रिता हृयश्रयतां प्रयान्ति।।

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