दुःख में सिमरन सब करें , सुख में करे न कोए
जो सुख में सिमरन करे तो दुःख कहे को होए
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सतयुग में १० वर्ष तक यग,ताप और दान करने से जो फल प्राप्ति होती थी, वही कलयुग में विश्वास के साथ किया जप,ताप और दान, अहोरातर में प्राप्त कर सकते हैं .
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कलयुग में केवल हरी कीर्तन से वो सब फल प्राप्त हो जाते हैं जिनके लिए राधा तंतर में मंतर माँ भगवती त्रिपुरा देवी के द्वारा भगवन वासुदेव के प्रति खा गया है
हरे कृषण,हरे कृषण,कृषण कृषण हरे हरे,हरे राम, हरे राम राम राम हरे हरे./
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