मन्त्रों का नियमित जाप चाहे किसी भी धार्मिक भाषा में हो मंतर सीधी जाप कहा कहा जाता है . शारीरक ,मानसिक, दुखों को दूर करने के वास्ते यह एक अत्यंत ही सुलभ उपाए होता है, लेकिन अगर यह मंतर जप स्वं ही किया जाए तो और भी उत्तम. मंतर शबरों ,अक्षर वाक्यों और रचना का संयोजन ही मंतर कहलाता है, मंतर ध्वनि विज्ञानं के विशेष नियम क्रम के अनुरूप ही होते हैं ,इन को उसी शुद्ध रूप में ही उचारण करना होता है, अन्यथा,इन का भाव रूप बदल जाता है जो की अनर्थ करी होगा ,मन्त्रों का अगर सही रूप से सञ्चालन किया जाए तो सफलतापूर्वक कष्टों को दूर करते हुए अछे परिणाम प्राप्त किएया जा सकते हैं, ............
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